परिचय
न्यूरास्थीनिया (Neurasthenia) एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें मानसिक और शारीरिक थकान अत्यधिक बढ़ जाती है। इसका उल्लेख 19वीं शताब्दी के अंत में हुआ था और इसे आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तनाव से जुड़ा विकार माना गया। आज यह नाम चिकित्सा में कम प्रयोग होता है, लेकिन इसके लक्षण आज भी क्रॉनिक थकान, तनाव विकार और चिंता से जुड़ी बीमारियों से मेल खाते हैं। यह एक प्रकार की मानसिक विक्षिप्त है जिससे अक्रान्त व्यक्ति मानसिक अथवा शारीरिक थकान से ग्रसित होता है। प्रायः 20 वर्ष से 45 वर्ष की अवस्था वाले पुरुष इस रोग से अधिक अक्रान्त होते हैं।
न्यूरास्थीनिया एक प्रकार का नसों का कार्यात्मक विकार है, जिसमें व्यक्ति को लगातार कमजोरी, थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है। यह किसी नस की संरचनात्मक क्षति से नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक ऊर्जा की अधिक खपत और थकान के कारण होता है।
Neurasthenia: 7 Major Causes of Nervous Exhaustion
इसका कोई विशिष्ट कारण नहीं है। इसके उत्तेजक कारण निम्न हैं-
1. अति परिश्रम (Over work)
2. चिंता (चिंता)
3. रुग्णावस्था, जैसे- रक्तअल्पता, इन्फ्लुएंजा या आन्त्रिक ज्वर।
4. मद्यपान तथा कोकेन का अत्यधिक सेवन।
5. निराशा होने पर अथवा महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति न होने पर या जीवन की असफलताओं के कारण।
6. स्वप्नदोष होते रहने पर अथवा हस्तमैथुन या यौन क्रियाओं में अधिकता बरतने के कारण भी ऐसी दुर्बलता हो सकती है।
7. यौन क्रियाओं के प्रति गलत धारणायें बनाये रखने तथा उसके कारण पैदा हुए अपराध का बोध भी इसका कारण बन सकता है।
Neurasthenia Symptoms: Key Signs of Nervous Exhaustion
इस रोग में रोगी प्रायः शारीरिक लक्षण ही बताता है जबकि इसके लक्षण प्रधानता मानसिक हुआ करते हैं। रोग का प्रारम्भ क्रमशः होता है तथा इससे ग्रसित रोगी थका हुआ अपने में ही केन्द्रीभूत प्रतीत होता है। इसके अन्तर्गत रोगी क्षुधानाश (Anorexia), आध्य- मान (Flatulence), अपचन (Dyspepsia) तथा पश्चकपाल शूल (Occipital headache) के लक्षण बताता है। न्यूरास्थीनिया एक प्रकार का नसों का कार्यात्मक विकार है, जिसमें व्यक्ति को लगातार कमजोरी, थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है। यह किसी नस की संरचनात्मक क्षति से नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक ऊर्जा की अधिक खपत और थकान के कारण होता है।
कभी-कभी रोगी सिर में अत्यधिक संकीर्णता के लक्षण भी बताता है। ऐसे रोगियों का सिर अत्यधिक खाली अथवा अत्यधिक भरा हुआ प्रतीत होता है। न्यूरेस्थेनिया से ग्रस्त रोगी को अक्सर धड़कन, चक्कर, चेहरे का लाल होना, अत्यधिक स्वेदन, जंभाई आना, गले में किसी चीज का अटकना, शरीर के विभिन्न भागों में सुन्नता इत्यादि लक्षण प्रतीत होते हैं। रोगी की पीठ में दर्द होता है (Backache)। नपुंसकता इस रोग का प्रधान लक्षण है।
लगातार थकान, आराम के बाद भी कमजोरी
चिड़चिड़ापन और गुस्सा
सिरदर्द और मांसपेशियों में तनाव
ध्यान व याददाश्त की कमी
नींद न आना या बार-बार टूटना
भूख कम लगना, बदहजमी
शोर या रोशनी से संवेदनशीलता
निराशा, हतोत्साह और उत्साह की कमी
Neurasthenia Treatment & Management: Best Practices for Recovery
न्यूरास्थीनिया का उपचार मुख्य रूप से जीवनशैली में सुधार, मानसिक संतुलन और चिकित्सीय सहयोग से किया जाता है।
- आराम और नींद – पर्याप्त नींद और आराम आवश्यक है।
- संतुलित आहार – पौष्टिक भोजन ऊर्जा और नसों की मजबूती के लिए ज़रूरी है।
- व्यायाम – हल्का-फुल्का व्यायाम रक्त संचार और मानसिक स्वास्थ्य सुधारता है।
- योग और ध्यान – तनाव घटाने और मन को शांत रखने में सहायक।
- काउंसलिंग व थेरेपी – मनोचिकित्सक से सलाह लेना, CBT जैसी थेरेपी।
- चिकित्सकीय सहायता – आवश्यकता पड़ने पर विटामिन सप्लीमेंट, एंटी-डिप्रेसेंट या एंटी-एंग्ज़ायटी दवाइयाँ।
निष्कर्ष
न्यूरास्थीनिया NEURASTHENIA हमें यह सिखाता है कि तनाव, अधिक काम और असंतुलित जीवनशैली शरीर और मन को कमजोर बना सकती है। यह एक चेतावनी संकेत है कि हमें अपनी दिनचर्या में आराम, संतुलित भोजन और मानसिक शांति के लिए समय निकालना चाहिए। सही उपचार और जीवनशैली में बदलाव से इस स्थिति से बाहर निकला जा सकता है और एक स्वस्थ जीवन जीया जा सकता है।